पांचवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन (ट्रिनिडाड एवं टोबेगो)

पांचवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन
तिथि 4-8 अप्रैल 1996
स्थान पोर्ट ऑफ स्पेन, त्रिनिडाड एवं टुबैगो।
आयोजक सम्मेलन का आयोजन हिंदी निधि संस्था द्वारा किया गया। इसके प्रमुख संयोजक हिंदी निधि के अध्यक्ष श्री चंका सीताराम थे।
विषय आप्रवासी भारतीय और हिंदी
प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता भारत के प्रतिनिधिमंडल के नेता श्री माता प्रसाद, राज्यपाल, अरूणाचल प्रदेश थे।
उद्घाटन समारोह
सम्मेलन का उद्घाटन सम्मेलन का उद्घाटन त्रिनिडाड एवं टुबैगो के प्रधानमंत्री श्री वासुदेव पांडे द्वारा किया गया।
स्वागत भाषण प्रो. जी. रिचर्डस, उपकुलपति, वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय द्वारा
अन्य वक्ता
  • श्री माता प्रसाद, नेता, भारतीय प्रतिनिधिमंडल
  • डॉ लक्ष्मीमल्ल सिंघवी, ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त
  • श्री आदेश नन्नान, त्रिनिडाड के शिक्षा मंत्री
  • श्री चंका सीताराम, अध्यक्ष, हिंदी निधि

आभार प्रो. जगन्नाथन
सम्मान समारोह उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
  • त्रिनिडाड एवं टुबैगो के प्रधानमंत्री श्री वासुदेव पांडे
  • श्री राल्फ माराज, विदेश मंत्री, त्रिनिडाड एवं टुबैगो
  • प्रो. जी. रिचर्डस, उपकुलपति, वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय
  • श्री माता प्रसाद, नेता, भारतीय प्रतिनिधिमंडल
  • श्री आदेश नन्नान, त्रिनिडाड के शिक्षा मंत्री
  • श्री जे. डोडामणि, त्रिनिडाड एवं टुबैगो में भारत के उच्चायुक्त
समापन समारोह
वक्ता
  • त्रिनिडाड एवं टुबैगो की सीनेट के अध्यक्ष माननीय गणेश रामदयाल
  • श्री माता प्रसाद, नेता, भारतीय प्रतिनिधिमंडल
शैक्षिक सत्र
मुख्य विषय
  • हिंदी भाषा और साहित्य का विकास
  • कैरेबियन द्वीपों में हिंदी की स्थिति
  • कंप्यूटर युग में हिंदी की उपादेयता
पूर्ण सत्र आप्रवासी भारतीय और संस्कृति
समानांतर सत्र
  • सूरीनाम में हिंदी भाषा और अस्मिता
  • भाषा अध्ययन का स्वरूप एवं क्षेत्र
  • आप्रवासी भारतीयों में हिंदी
  • भारतीय संस्कृति तथा हिंदी के भाषा वैज्ञानिक पहलू
  • मॉरीशस में हिंदी
  • भारतीय संस्कृति और हिंदी
  • व्याकरण और कोश विज्ञान
  • तकनीकी हिंदी
  • साहित्यिक संगोष्ठी
  • संपर्क भाषा हिंदी
  • राष्ट्र-भाषा हिंदी
  • हिंदी का उद्भव अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में
  • हिंदी भाषा और साहित्यः दो चेहरे
  • हिंदी: एक विभिन्न आयामी संस्थान
  • उन्नीसवीं सदी की हिंदी का 20वीं सदी में प्रवेशः भावी उत्थान की कथा,
  • विदेशों में हिंदी का अध्यापन
  • त्रिनिडाड में हिंदी का अध्यापन
  • हिंदी की वाचक और लिखित परंपरा
  • रेडियोः साहित्य और संस्कृति की पृष्ठभूमि
  • हिंदी और हिन्दुत्व का पारस्परिक समन्वय
  • भाषा का पुनरूत्थानः कहां, कैसे और क्यों
  • हिंदी के प्रसार की संभावनाएँ और अन्य भाषाओं से सहयोग के क्षितिज
  • उपनिवेशवाद और विस्तारवाद के प्रतिरोध में समर्थ हिंदी और उसका संघर्ष
  • हिंदी: सामाजिक और राजनीतिक पुनर्जागरण में भूमिका ।
अन्य कार्यक्रम प्रदर्शनी
  • सी – डेक द्वारा कंप्यूटर प्रदर्शनी,
  • पुस्तक प्रदर्शनी
  • 'हिंदी के बढ़ते चरण' नाम से हिंदी भाषा के विकास और इतिहास की चित्रमय झांकी
सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • रामलीला कला केन्द्र द्वारा 'रामलीला' की प्रस्तुति
  • कानपुर नौटंकी मंडली की प्रस्तुति
  • गुलाब थियेटर कंपनी की प्रस्तुति
  • भारत की कई फीचर फिल्मों की प्रस्तुति

सरकारी प्रतिनिधिमंडल
  • भारत 17
  • नेपाल
  • मॉरीशस 4
  • दक्षिण अफ्रीका 2
  • सूरीनाम 55
  • गुयाना 15
  • त्रिनिडाड एवं टुबैगो 58
अन्य विशेषताएँ
  • त्रिनिडाड एवं टुबैगो में क्रीड़ा के क्षेत्र में योगदान के लिए ब्रायन लारा सम्मानित
  • दूरदर्शन द्वारा सैटेलाइट से सीधा प्रसारण
  • आयोजन स्थल का नाम 'हिंदी नगर' रखा गया
  • त्रिनिडाड की सरकार द्वारा प्रतिनिधियों को वीजा शुल्क से मुक्त रखा गया।
  • भारतीय, अफ्रीकी और पाश्चात्य संगीत की मिश्रित प्रस्तुति की गई।

पांचवें विश्व हिंदी सम्मेलन में पारित मंतव्य

  • यह सम्मेलन भारतवंशी समाज एवं हिंदी के बीच जीवंत समीकरण बनाने का प्रबल समर्थन करता है और यह आशा करता है कि विश्वव्यापी भारतवंशी समाज हिंदी को अपनी संपर्क भाषा के रूप में स्थापित करेगा एवं एक विश्व हिंदी मंच बनाने में सहायता करेगा।
  • सम्मेलन चिरकाल से अभिव्यक्त अपने मंतव्य की पुनः पुष्टि करता है कि विश्व हिंदी सम्मेलन को स्थाई सचिवालय की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। सम्मेलन के विगत मंतव्य के अनुसार यह सचिवालय मॉरिशस में स्थापित होना निर्णित है। इसके त्वरित कार्यान्वयन के लिए एक अंतर सरकारी समिति का गठन किया जाए। इस समिति का गठन मॉरीशस एवं भारत सरकार द्वारा किया जाना चाहिए। इस समिति में सरकारी प्रतिनिधियों के अलावा पर्याप्त संख्या में हिंदी के प्रति निष्ठावान साहित्यकारों को सम्मिलित किया जाए। यह समिति अन्य बातों के साथ-साथ सचिवालयी व्यवस्था के अनेकानेक पहलुओं पर विचार करते हुए एक सर्वांगीण कार्यक्रम योजना भारत तथा मॉरीशस की सरकारों को प्रस्तुत करेगी।
  • यह सम्मेलन सभी देशों, विशेषकर उन देशों जहां भारतीय मूल के लोग तथा आप्रवासी भारतीय बसते हैं, की सरकारों से आग्रह करता है कि वे अपने देश में विभिन्न स्तरों पर हिंदी के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था करें।
  • यह सम्मेलन विश्व स्तर पर हिंदी भाषा को प्राप्त जनाधार और उसके प्रति जनभावना को देखते हुए सभी देशों, जहां भारतीय मूल तथाआप्रवासी भारतीय बसते हैं, में हिंदी के प्रचार-प्रसार में संलग्न स्वयं सेवी संस्थाओं/ हिंदी विद्वानों से आग्रह करता है कि वे अपनी-अपनी सरकारों से आग्रह करें कि वे हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बनाने के लिए राजनयिक योगदान तथा समर्थन दें।
  • यह सम्मेलन भारत सरकार द्वारा महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्व विद्यालय स्थापित करने के निर्णय का स्वागत करता है और आशा करता है कि इस विश्व विद्यालय की स्थापना से हिंदी को विश्वव्यापी बल मिलेगा।

पांचवें विश्व हिंदी सम्मेलन में सम्मानित विदेशी एवं भारतीय विद्वान

विदेशी हिंदी विद्वान

क्र.सं. नाम
1. प्रो. डॉ. एम. क्रिजीस्तोप ब्रिस्की
2. डॉ. रूपर्ट स्नेल
3. डॉ. ओदोलेन स्मेकल
4. प्रो. हरिशंकर आदेश
5. प्रो. पी. अलेक्सेविच बरान्निकोव
6. डॉ. अभिमन्यु अनत
7. प्रो. चिन तिंगहान
8. स्तेपान इवानोविच नालिवायको
9. डॉ. ज्ञान हंसदेव अधीन
10. डॉ. रामभजन सीताराम
11. डॉ. रामदयाल राकेश
12. प्रो. जोंग ही ली
13. प्रो. गोका

भारतीय हिंदी विद्वान

क्र.सं. नाम
1. डॉ. विद्या निवास मिश्र
2. डॉ. रामचन्द्र राव
3. डॉ. नामवर सिंह
4. डॉ. लोकेश चन्द्र
5. डॉ. नगेन्द्र
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