प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन (भारत)

प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन
तिथि 10-12 जनवरी 1975
स्थान भारत।
आयोजक सम्मेलन का आयोजन 'राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा' के तत्वाधान में किया गया। सम्मेलन से संबंधित राष्ट्रीय आयोजन समिति के अध्यक्ष, महामहिम उपराष्ट्रपति श्री बी.डी. जत्ती थे।
बोधवाक्य 'वसुधैव कुटुंबकम्' ।
प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता सम्मेलन में मुख्य अतिथि मॉरीशस के प्रधानमंत्री सर शिव सागर राम गुलाम थे जिनकी अध्यक्षता में मॉरीशस से एक प्रतिनिधिमंडल ने सम्मेलन में भाग लिया।
उद्घाटन- समारोह
सम्मेलन का उद्घाटन सम्मेलन का उद्घाटन दिनांक 10 जनवरी,1975 को भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा किया गया।
अध्यक्षता एवं मुख्य अतिथि उद्घाटन- समारोह में मुख्य अतिथि मॉरीशस के प्रधानमंत्री सर शिव सागर रामगुलाम थे जिन्होंने समारोह की अध्यक्षता भी की।
स्वागत भाषण श्री बसंतराव नाइक, मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र
अन्य वक्ता काका साहेब कालेलकर, अनंत गोपाल शेवड़े, महासचिव, विश्व हिंदी सम्मेलन; श्री अशर डिलियॉन, यूनेस्को के प्रतिनिधि
आभार डॉ कर्ण सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री
समापन- समारोह
आयोजन 1975
अध्यक्षता भारत के महामहिम उपराष्ट्रपति श्री बी.डी.जत्ती
विशेष अतिथि श्री कमलापति त्रिपाठी, केंद्रीय परिवहन मंत्री
मुख्य- वक्ता श्रीमती महादेवी वर्मा
अन्य- वक्ता
  • श्री कालीचरण पाणिग्रही, उड़िया लेखक
  • श्री बशीर अहमद मयूख, राजस्थानी लेखक
  • प्रो. राम पंजवानी, सिंधी लेखक
  • श्री फिन थीसेन, डेनमार्क के प्रतिनिधि
  • डॉ ओदोनेल स्मेकल, चेकोस्लोवाकिया
  • फादर कामिल बुल्के
  • मारिया क्रिस्टोफ ब्रिस्की, पोलेंड की प्रतिनिधि
धन्यवाद- ज्ञापन श्री अनंत गोपाल शेवड़े, महासचिव,विश्व हिंदी सम्मेलन
शैक्षिक- सत्र कुल सात शैक्षिक सत्र आयोजित किए गए जिनमें दो पूर्ण सत्र थे और पाँच समानांतर सत्र थे।
सम्मेलन में मुख्य रूप से तीन विषय रखे गएः
  • हिंदी की अंतरराष्ट्रीय स्थिति
  • विश्व मानव की चेतना, भारत और हिंदी
  • आधुनिक युग और हिंदी: आवश्यकताएं और उपलब्धियां ।
विषयः हिंदी की अंतरराष्ट्रीय स्थिति
• समानांतर सत्रों के विषय

'विश्व मानव की चेतना, भारत और हिंदी' विषय के अंतर्गत सत्र

  • शाश्वत मूल्यों की खोज
  • जन संचार साधनों की भूमिका, और
  • विश्व मानव का मूल्यगत संकट और भाषा तथा लेखन के संदर्भ में युवा पीढ़ी की मानसिकता ।

'आधुनिक युग और हिंदी: आवश्यकताएँ और उपलब्धियाँ' विषय के अन्तर्गत सत्र

  • प्रशासन, विधि और विधायी कार्यों की भाषा
  • ज्ञान-विज्ञान का माध्यम
  • भाषा शिक्षण और सहायक सामग्री
प्रदर्शनी सम्मेलन के अवसर पर एक बृहत् प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। इसे सांस्कृतिक कक्ष, दृश्य प्रचार निदेशालय कक्ष, लिपि-विस्तार कक्ष, राष्ट्र-भाषा कक्ष और हिंदी पुस्तक प्रदर्शनी कक्ष में विभाजित किया गया था।

सांस्कृतिक कक्ष

सांस्कृतिक प्रदर्शनी का आयोजन स्थानीय कला महाविद्यालय की ओर से किया गया जिसमें वैदिक काल से लेकर परमाणु युग तक की सांस्कृतिक झाँकी प्रस्तुत की गई।

दृश्य प्रचार निदेशालय कक्ष

भारत सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा हिंदी के प्रचार-प्रसार और विकास के लिए किए गए कार्यों का परिचय देने के उद्देश्य से दृश्य प्रचार निदेशालय की ओर से यह प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें भारत सरकार के लगभग 20 विभागों तथा संस्थाओं ने भाग लिया।

राष्ट्रभाषा कक्ष

इसमें राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा द्वारा हिंदी के प्रचार- प्रसार के लिए किए गए कार्यों की झलक प्रस्तुत की गई।

पुस्तक-प्रदर्शनी

पुस्तक प्रदर्शनी में अखिल भारतीय हिंदी प्रकाशक संघ और नेशनल बुक ट्रस्ट की ओर से निजी प्रकाशकों की लगभग 4000 पुस्तकों को प्रदर्शन किया गया।

सांस्कृतिक- कार्यक्रम
10 जनवरी 1975 भारतीय कला केंद्र द्वारा "रामलीला" की प्रस्तुति
11 जनवरी 1975 भारतीय कला केंद्र द्वारा "मीरा" की प्रस्तुति
12 जनवरी 1975
  • भारतीय कला केंद्र द्वारा महाकवि दिनकर की कृति "उर्वशी" पर आधारित नृत्य नाटिका की प्रस्तुति
  • आकाशवाणी के कलाकारों द्वारा संगीत कार्यक्रम
  • मॉरीशस की कलाकार मंडली 'त्रिवेणी' द्वारा डॉ धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध नाटक अंधा युग का मंचन
13 जनवरी 1975 अंतरराष्ट्रीय कवि गोष्ठी का आयोजन। इस कवि गोष्ठी का संचालन डॉ. शिव मंगल सिंह सुमन तथा श्री बाल कवि बैरागी द्वारा किया गया।
विदेशों से प्रतिभागिता इस सम्मेलन में 30 देशों से 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
अन्य विशेषताएँ इस अवसर पर एक विशेष डाक टिकट जारी किया गया। आर्चाय विनोबा भावे जी द्वारा भेजे गए संदेश का पाठ किया गया। आयोजन स्थल का नाम 'विश्व हिंदी नगर' रखा गया था,प्रवेश द्वारों के नाम- तुलसी, मीरा, सूर, कबीर, नामदेव और रैदास रखे गए थे। दक्षिण भारत से 400 प्रतिनिधि शामिल हुए। यूनेस्को द्वारा एक वरिष्ठ अधिकारी को भेजा गया व 6000 डालर का अनुदान दिया गया। 14 जनवरी को राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के केंद्रीय कार्यालय के प्रांगण में विश्व हिंदी विद्यापीठ का शिलान्यास और संत तुलसीदास की प्रतिमा का फादर कामिल बुल्के द्वारा अनावरण किया गया।

प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन में पारित मंतव्य

  • संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थान दिलाया जाए।
  • विश्व हिंदी विद्यापीठ की स्थापना वर्धा में हो।
  • विश्व हिंदी सम्मेलनों को स्थायित्व प्रदान करने के लिए अत्यंत विचारपूर्वक एक योजना बनाई जाए।

प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन में सम्मानित विद्वान

भारतीय भाषाओं के सम्मानित लेखक

क्र.सं. नाम

1.

प्रा. राम पंजवानी

सिंधी

2.

पद्मभूषण विष्णु सखाराम खांडेकर

मराठी

3.

प्रा. टी.पी. मीनाक्षी सुन्दरम्

तमिल

4.

पद्मश्री अमृता प्रीतम

पंजाबी

5.

श्री त्रिभुवनदास पुरुषोत्तमदास लुहार सुन्दरम्

गुजराती

6.

पद्मभूषण जी. शंकर कुरुप्प

मलयालम

7.

पद्मभूषण कालिंदीचरण पाणिग्रही

उड़िया

8.

पद्मश्री दत्तात्रय रामचंद्र बेन्द्रे

कन्नड़

9.

प्रो. विश्वनाथ सत्यनारायण

तेलुगु

10.

पद्मश्री अली सरदार जाफरी

उर्दू

11.

पद्मश्री अख्तर मोहिउद्दीन

कश्मीरी

12.

पद्मश्री प्रेमेन्द्र मित्र

बंगला

13.

पद्मविभूषण महादेवी वर्मा

हिंदी

14.

पद्मश्री नलिनीबालादेवी

असमिया

15.

पद्मभूषण राजेश्वर शास्त्री द्रविड़

संस्कृत

सम्मानित अहिंदी भाषी हिंदी लेखक

क्र.सं. नाम

1.

श्री मन्मथनाथ गुप्त

बंगला

2.

श्रील संतराम बी.ए.

पंजाबी

3.

श्री मोतीलाल जोतवानी

सिंधी

4.

श्री सिद्धनाथ पंत

कन्नड़

5.

श्री रजनीकांत चक्रवर्ती

असमिया

6.

श्री डा. प्रह्लाद प्रधान

उड़िया

7.

डा. प्रभाकर माचवे

मराठी

8.

श्री र. वीलिनाथन

तमिल

9.

श्री मो. सत्यनारायण

तेलुगु

10.

श्री पृथ्वीनाथ 'पुष्प'

कश्मीरी

11.

डा. विश्वनाथ अय्यर

मलयालम

12.

श्री शंकरदेव विद्यालंकार

गुजराती

विशिष्ट सम्मानित लेखक

क्र.सं. नाम

1.

श्री पं. नंदकुमार अवस्थी

कुरान शरीफ का देवनागरी में लिप्यंतरण के लिए

2.

श्री बशीर अहमद मयूख

वेदों का हिंदी में अनुवाद करने के लिए

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