चौथा विश्व हिंदी सम्मेलन (मॉरीशस)

चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन
तिथि 2-4 दिसंबर, 1993
स्थान पोर्ट लुई, मॉरीशस
बोधवाक्य 'वसुधैव कुटुंबकम्'
आयोजक राष्ट्रीय आयोजन समिति के अध्यक्ष, श्री मुकेश्वर चुनी, कला, संस्कृति, अवकाश एवं सुधार संस्थान मंत्री, मॉरीशस थे।
प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता भारत के प्रतिनिधिमंडल के नेता श्री मधुकर राव चौधरी एवं उपनेता गृह मंत्रालय के उपमंत्री श्री रामलाल राही थे।
उद्घाटन समारोह
सम्मेलन का उद्घाटन सम्मेलन का उद्घाटन मॉरीशस के प्रधानमंत्री सर अनिरुद्ध जगन्नाथ द्वारा किया गया।
अन्य वक्ता
  • श्री मुकेश्वर चुनी, कला, संस्कृति, अवकाश एवं सुधार संस्थान मंत्री, मारीशस
  • प्रधानमंत्री सर अनिरुद्ध जगन्नाथ
  • श्री राजनारायण गति, राष्ट्रीय आयोजन समिति के महासचिव
  • श्री मधुकर राव चौधरी, नेता, भारतीय प्रतिनिधिमंडल
समापन समारोह
अध्यक्षता श्री रवींद्र घरबरन, महामहिम उपराष्ट्रपति, मॉरीशस
अन्य वक्ता
  • श्री रामलाल राही, गृह मंत्रालय के उपमंत्री
  • श्री राजनारायण गति, महासचिव, राष्ट्रीय संचालन समिति
  • श्री मुकेश्वर चुनी, कला, संस्कृति, अवकाश एवं सुधार संस्थान मंत्री, मारीशस
  • डॉ. विद्यानिवास मिश्र
  • डॉ. एम. चिन्तामणि, अध्यक्ष, शैक्षिक परिषद् द्वारा संकल्पों की प्रस्तुति
शैक्षिक सत्र
दो पूर्ण सत्र
  • हिंदी की अंतरराष्ट्रीय स्थिति
  • स्वस्थ मूल्यों की खोज
पाँच समानांतर सत्र
  • जनसंचार साधनों की भूमिका
  • विश्व मानव का मूल्यगत संकट और भाषा
  • लेखन के संदर्भ में युवा पीढ़ी की मानसिकता
  • प्रशासन, विधि और विधायी कार्यों की भाषा
  • भाषा शिक्षण और सहायक सामग्री
अन्य कार्यक्रम
प्रदर्शनी हिंदी के विकास संबंधी प्रदर्शनी

सांस्कृतिक कार्यक्रम

भारतीय कला केंद्र द्वारा प्रस्तुति
  • राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा मोहन राकेश के नाटकों की प्रस्तुति।
  • पांडवाणी गीत प्रस्तुति
  • भोजपुरी सांस्कृतिक दलों द्वारा प्रस्तुति।
  • महात्मा गांधी संस्थान द्वारा नृत्य नाटिका की प्रस्तुति।
  • मॉरीशस के कला, संस्कृति, अवकाश एवं सुधार संस्थान मंत्रालय द्वारा नाटक का मंचन।

चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन पारित मंतव्य

  • चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन की आयोजक समिति को यह अधिकार दिया जाता है कि वह भारत और मॉरिशस के प्रधानमंत्रियों से परामर्श करके तीन माह के अन्दर एक स्थायी समिति एवं सचिवालय गठित करे जिसका लक्ष्य भविष्य में विश्व हिंदी सम्मेलनों का आयोजन करना तथा अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी का विकास और उत्थान करना होगा।
  • यह सम्मेलन पिछले तीनों विश्व हिंदी सम्मेलनों में पारित संकल्पों की संपुष्टि करते हुए 'विश्व हिंदी विद्यापीठ' की शीघ्रातिशीघ्र स्थापना की मांग करता है। साथ ही मॉरिशस में विश्व हिंदी केन्द्र की स्थापना की मांग को दोहराता है।
  • सम्मेलन इस तथ्य पर संतोष व्यक्त करता है कि विश्व के अनेक विश्व विद्यालयों में हिंदी का अध्ययन और अध्यापन उत्तरोतर बढ़ता जा रहा है। यह सम्मेलन विभिन्न राष्ट्र सरकारों और विश्व विद्यालयों से अनुरोध करता है कि वे हिंदी पीठों की स्थापना उत्साहपूर्वक करें।
  • इस सम्मेलन का यह मंतव्य है कि विश्व के सभी देशों, विशेषकर भारत तथा भारतीय मूल की जनसंख्या वाले देशों के बीच सर्वविद संचार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाए। हिंदी को प्राथमिकता देते हुए इन देशों के साथ आकाशवाणी, दूरदर्शन और समाचार समितियों के प्रगाढ़ संबंध स्थापित किए जाएं। इस संदर्भ में भारत और मॉरिशस के बीच हिंदी की समाचार समिति 'भाषा' की सेवा शुरु होने पर सम्मेलन प्रसन्नता व्यक्त करता है और इस ऐतिहासिक कदम के लिए मॉरीशस और भारत के प्रधानमंत्रियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता है। सम्मेलन भारत से अनुरोध करता है कि हिंदी के दैनिक समाचार पत्र, पत्रिकाएं और पुस्तकें प्रकाशित करने में सक्रिय सहायता करे।
  • चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन की मान्यता है कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी का प्रयोग और प्रभाव बढ़ा है लेकिन इसके बावजूद हिंदी को उसका उचित स्थान प्राप्त नहीं हो सका है। अतः यह सम्मेलन महसूस करता है कि हिंदी को उसका उचित स्थान दिलाने के लिए शासन और जन समुदाय विशेष प्रयत्न करे।
  • यह सम्मेलन विश्व के समस्त हिंदी प्रेमियों से अनुरोध करता है कि वे अपने निजी एवं सार्वजनिक कार्यों में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करें और यह संकल्प लें कि वे कम से कम अपने हस्ताक्षरों, निमंत्रण पत्रों, निजी पत्रों और नामपट्टों में हिंदी का प्रयोग करेंगे।
  • इस सम्मेलन में आए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने-अपने देशों के शासन को सम्मेलन की इस मांग से अवगत कराएंगे कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए वे सघन प्रयास करें ।

चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन में सम्मानित विद्वान

चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन के अवसर पर मॉरीशस के चार हिंदी विद्वानों का सम्मान किया गया।

क्र.सं. नाम
1. श्री प्रहलाद रामशरण
2. श्री भानुपति नागदाव
3. पं. रामदत्त शर्मा महावीर
4. पं. रामस्वरूप रामसिंह
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