नौवां विश्व हिंदी सम्मेलन (दक्षिण अफ्रीका)

नौवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन
तिथि 22-24 सितंबर, 2012
स्थान जोहांसबर्ग, दक्षिण अफ्रीका
आयोजक

सम्मेलन का आयोजन विदेश मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया। हिंदी शिक्षा संघ,दक्षिण अफ्रीका सहयोगी संगठन था।

मुख्य विषय ‘भाषा की अस्मिता और हिंदी का वैश्विक संदर्भ’
मुख्य अतिथि महामहिम श्री प्रवीण गोर्धन वित्त मंत्री, दक्षिण अफ्रीका
विशेष अतिथि महामहिम श्री मुकेश्वर चुन्नी कला एवम संस्कृति मंत्री, मॉरीशस
शैक्षिक- सत्र
  • महात्मा गांधी की भाषा दृष्टि और वर्तमान का संदर्भ
  • हिंदीः फिल्म, रंगमंच और मंच की भाषा
  • सूचना प्रौद्योगिकीः देवनागरी लिपि और हिंदी का सामर्थ्य
  • लोकतंत्र और मीडिया की भाषा के रूप में हिंदी
  • विदेश में भारतः भारतीय ग्रंथों की भूमिका
  • ज्ञान-विज्ञान और रोजगार की भाषा के रूप में हिंदी
  • हिंदी के विकास में विदेशी/प्रवासी लेखकों की भूमिका
  • हिंदी के प्रसार में अनुवाद की भूमिका
शैक्षिक- सत्र -1 : महात्मा गाँधी की भाषा दृष्टि और वर्तमान का संदर्भ
अध्यक्ष श्री विभूति नारायण राय
संचालक डा. हरजेन्द्र चौधरी
विशेष अतिथि एवम बीज वक्ता न्यायमूर्ति चन्द्रशेखर धर्माधिकारी
अन्य वक्ता श्री मधुकर उपाध्याय
प्रो. कृष्णदत्त पालीवाल
डॉ.विजय बहादुर सिंह
प्रो. नन्द किशोर आचार्य
प्रो. राम भजन सीताराम (दक्षिण अफ्रीका)

शैक्षिक सत्र-2 :अफ्रीका में हिंदी शिक्षण – युवाओं का योगदान
अध्यक्ष डॉ. विमलेश कांति वर्मा
संचालक डॉ. ऊषा शुक्ल, दक्षिण अफ्रीका
बीज वक्ता सुश्री मालती रामबली, दक्षिण अफ्रीका
विशेष अतिथि श्री रघुनंदन शर्मा, संसद सदस्य
अन्य वक्ता

श्रीमती सरिता बुधू, मारीशस
श्री सत्यदेव टेंगर
श्री नारायण कुमार
डॉ. वीणा लछमन, दक्षिण अफ्रीका

शैक्षिक सत्र-3 :सूचना प्रौद्योगिकी – देवनागरी लिपि और हिंदी का सामर्थ्य
अध्यक्ष डॉ. अशोक चक्रधर
संचालक श्री बालेन्दु दाधीच
बीज वक्ता श्री ओम विकास
विशेष अतिथि सुश्री अलका बलराम क्षत्रिय, संसद सदस्य
अन्य वक्ता

श्री जगदीप सिंह डांगी
श्री महेश कुलकर्णी
श्री आर. सुरेन्द्रन
श्री परमानन्द पांचाल

शैक्षिक सत्र-4 : हिंदी के विकास में विदेशी / प्रवासी लेखकों की भूमिका
अध्यक्ष डॉ. गोपेश्वर सिंह
संचालक डॉ. कमल किशोर गोयनका
बीज वक्ता श्री भारत भारद्वाज
विशेष अतिथि श्री किशन भाई पटेल, संसद सदस्य
अन्य वक्ता

श्री राकेश पांडेय
श्री दिनेश कुमार शुक्ल
डॉ. ऊषा देसाई, दक्षिण अफ्रीका
डॉ. सोमा बंद्योपाध्याय
डॉ. केदार मंडल
श्री शंभु गुप्त

शैक्षिक सत्र-5 :लोकतंत्र और मीडिया की भाषा के रूप में हिंदी
अध्यक्ष श्री शशि शेखर
संचालक श्री संजीव
बीज वक्ता डॉ. रवीन्द्र कालिया
विशेष अतिथि श्री मणिशंकर अय्यर, संसद सदस्य
अन्य वक्ता

प्रो. शम्भुनाथ
श्री अखिलेश
श्री कमलेश जैन
श्री कुरबान अली
श्री फकीर हसन, दक्षिण अफ्रीका

शैक्षिक सत्र-6:ज्ञान-विज्ञान और रोज़गार की भाषा के रूप में हिंदी
अध्यक्ष प्रो. जाबिर हुसैन
संचालक श्री मुहम्मद आरिफ
बीज वक्ता श्रीमती चित्रा मुद्गल
अन्य वक्ता

श्रीमती ममता कालिया
प्रो. आर. एस. सराजु
श्री रवि चतुर्वेदी
श्री उपेन्द्र कुमार
श्रीमती शिवा श्रीवास्तव, दक्षिण अफ्रीका
मोहम्मद कुंजू मथारू

शैक्षिक सत्र-7:विदेश में भारत – भारतीय ग्रंथों की भूमिका
अध्यक्ष डॉ. रत्नाकर पांडेय
संचालक डा. रामेश्वर राय
बीज वक्ता श्री नरेन्द्र कोहली
विशेष अतिथि डा. प्रसन्न कुमार पाठसानी, संसद सदस्य
अन्य वक्ता

श्री अनंत राम त्रिपाठी
श्रीमती शांता बाई
प्रो. मैनेजर पाण्डेय
श्री दूध नाथ सिंह
डॉ. ऊषा शुक्ल, दक्षिण अफ्रीका

शैक्षिक सत्र-8:हिंदी – फिल्म, रंगमंच और मंच की भाषा
अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर श्रोत्रिय
संचालक डा. बदरी नारायण
बीज वक्ता श्री प्रयाग शुक्ल
विशेष अतिथि
अन्य वक्ता

श्री गिरधर राठी
प्रो. असगर वजाहत
श्री हृषीकेश सुलभ
श्रीमती भवानी प्रीतिपाल, दक्षिण अफ्रीका

शैक्षिक सत्र-9:हिंदी के प्रचार-प्रसार में अनुवाद की भूमिका
अध्यक्ष प्रो. गंगा प्रसाद विमल
संचालक डॉ.राजेन्द्र प्रसाद मिश्र
बीज वक्ता डा. इन्द्रनाथ चौधुरी
विशेष अतिथि डॉ. कैलाश चन्द्र पंत
अन्य वक्ता

श्रीमती मृदुला सिन्हा
श्रीमती रीता रानी पालीवाल
डॉ.ओम प्रकाश बाल्मीकि
डॉ. ध्रुव पांडेय, दक्षिण अफ्रीका

अन्य कार्यक्रम

सांस्कृतिक- कार्यक्रम

भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ने शेखर सेन द्वारा मंचित नाटक कबीर का प्रबंध किया था।

ओडिसी प्रस्तुति- भारतीय सांस्कृतिक संबंध, केंद्र, जोहांसबर्ग के कलाकारों द्वारा 'शुभम स्वागतम' शास्त्रीय प्रस्तुति; जुलू कलाकारों द्वारा एक प्रस्तुति

प्रदर्शनी

महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा द्वारा संयुक्त रूप से एक प्रदर्शनी लगाई गई थी।
अन्य सहभागियों में केन्द्रीय हिंदी संस्थान, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, राष्ट्रीय अभिलेखागार और सी-डेक थे।

अन्य विशेषताएं

सम्मेलन के पूर्व आरंभ में, मंत्रालय ने 9वें विश्व हिंदी सम्मेलन के मुख्य विषय वस्तुओं से संबंधित महत्वपूर्ण लेखों पर संकलन 'स्मारिका' के रूप में निकाला था।
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ने अपने मासिक प्रकाशन 'गगनांचल' का एक विशेष अंक निकाला।
महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय ने दैनिक बुलेटिन 'हिंदी विश्व' निकाला।
इस अवसर पर 40 से भी अधिक पुस्तकों का लोकार्पण हुआ।
'हिंदी शिक्षा संघ' के संस्थापक, पंडित नारदेव वेदालांकर की प्रतिमा का अनावरण, श्रीमती प्रणीत कौर द्वारा किया गया।


नौवें विश्व हिंदी सम्मेलन में पारित मंतव्य

  • 9वाँ विश्व हिंदी सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका के जोहांसबर्ग शहर में आयोजित किया गया। दक्षिण अफ्रीका में सम्मेलन का आयोजन न केवल दक्षिण अफ्रीका के साथ बल्कि इस पूरे क्षेत्र के साथ भारत एवं भारतीयों के ऐतिहासिक, सुदृढ़ एवं बढ़ते हुए संबंधों को परिलक्षित करता है। यह हिंदी प्रेमियों के वैश्विक समुदाय की इस देश के साथ महात्मा गांधी के संबंधों के प्रति भावभीनी श्रद्धांजलि है।
  • इस सम्मेलन ने दक्षिण अफ्रीका के महान् नेता डॉ. नेल्सन मंडेला के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया जिन्होंने महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित शांति, अहिंसा एवं न्याय के शाश्वत सिद्धांतों को आत्मसात करके पुनः केवल अपने देश के लिए ही नहीं बल्कि विश्व मानव के कल्याण के लिए एक सम्मानित जीवन का मार्ग प्रशस्त किया। सम्मेलन डॉ. मंडेला को ससम्मान शुभकामनाएं ज्ञापित करता है।
  • 22 से 24 सितंबर 2012 को दक्षिण अफ्रीका में आयोजित 9वें विश्व हिंदी सम्मेलन ने, जिसमें विश्वभर के हिंदी विद्वानों, साहित्यकारों और हिंदी प्रेमियों आदि ने भाग लिया, रेखांकित किया किः
क. हिंदी के बढ़ते हुए वैश्वीकरण के मूल में गांधी जी की भाषा दृष्टि का महत्वपूर्ण स्थान है।

ख. मारीशस में विश्व हिंदी सचिवालय की स्थापना की संकल्पना प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन के दौरान की गई थी। यह सम्मेलन इस सचिवालय की स्थापना के लिए भारत और मारीशस की सरकारों द्वारा किए गए अथक प्रयासों एवं समर्थन की सराहना करता है।

ग. महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय भी विश्व हिंदी सम्मेलनों में पारित संकल्पों का ही परिणाम है। यह विश्वविद्यालय हिंदी के प्रचार-प्रसार और उपयुक्त आधुनिक शिक्षण उपकरण विकसित करने में सराहनीय कार्य कर रहा है।

घ. सम्मेलन केंद्रीय हिंदी संस्थान की भी सराहना करता है कि वह उपयुक्त पाठ्यक्रम और कक्षाओं का संचालन करके विदेशियों और देश के गैर हिंदीभाषी क्षेत्र के लोगों के बीच हिंदी का प्रचार-प्रसार कर रहा है

ङ. सम्मेलन इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया विशेषकर हिंदी मीडिया, फिल्मों और थिएटर द्वारा किए जा रहे कार्य की भी प्रशंसा करता है जो हिंदी के माध्यम से घर-घर तक ज्ञान पहुंचा रहे हैं।

च. सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका में हिंदी शिक्षा संघ तथा अन्य संस्थाओं द्वारा हिंदी शिक्षण एवं हिंदी के प्रसार के लिए किए जा रहे कार्य की प्रशंसा करता है और हिंदी को समर्थन प्रदान करने के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त करता है।

छ. हिंदी में युवा वर्ग की रुचि निरंतर बढ़ रही है जो सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी उपकरण विकसित किए जाने के साथ-साथ हिंदी फिल्मों, इलेक्ट्रानिक मीडिया तथा सोशल मीडिया की भूमिका का ही एक भाग है और हिंदी भाषा को व्यापार, वाणिज्य और बाजार से जोड़ने का परिणाम है।

ज. विदेशी नागरिक हिंदी भाषा, साहित्य और भारतीय संस्कृति में अपनी रुचि के अलावा व्यावसायिक कारणों से भी हिंदी सीख रहे हैं जो वैश्विक संदर्भ में हिंदी की प्रासंगिकता और इसके महत्व को प्रतिपादित करते हैं।

झ. हिंदी के विकास में विदेश में रह रहे प्रवासी लेखकों की महत्वपूर्ण भूमिका सराहनीय है।

ञ. सम्मेलन में स्मारिका गगनांचल पत्रिका के विशेषांक प्रकाशित किए गए। इनके सुचारु रूप से किए गए प्रकाशन के लिए सम्मेलन इनके संपादक मंडलों और लेखकों की सराहना करता है।

ट. हिंदी भाषा, साहित्य, सूचना प्रौद्योगिकी एवं विशेष तौर पर महात्मा गांधी के जीवन एवं साहित्य पर लगाई गई समेकित प्रदर्शनी सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण आकर्षण रही है और इसमें सभी प्रतिभागियों ने गहरी रुचि दिखाई है। सम्मेलन प्रदर्शनी के आयोजकों के प्रयास की सराहना करता है।

ठ. इस अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद तथा दक्षिण अफ्रीका के स्थानीय कलाकारों द्वारा की गई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी सभी उपस्थित प्रतिभागियों को प्रभावित किया। सम्मेलन इन कार्यक्रमों के आयोजकों की सराहना करता है।

ड. सम्मेलन की दैनिक गतिविधियों पर प्रतिदिन एक समाचार पत्रिका निकाली गई। इसके लिए महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय द्वारा किए गए प्रयत्न एवं परिश्रम की सम्मेलन सराहना करता है।

ढ. इस अवसर पर दक्षिण अफ्रीका की सरकार द्वारा दिए गए समर्थन, सहयोग, सहायता एवं भागीदारी के लिए सम्मेलन ने दक्षिण अफ्रीका की सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया जिसके कारण इस सम्मेलन का आयोजन सुचारु रूप से संपन्न हो सका।

2. 9वें विश्व हिंदी सम्मेलन के उपर्युक्त बिन्दुओं पर हुई कार्रवाई के आलोक में सम्मेलन चाहता है किः

i. मॉरीशस में स्थापित विश्व हिंदी सचिवालय विभिन्न देशों के हिंदी शिक्षण से संबद्ध विश्वविद्यालयों, पाठशालाओं एवं शैक्षिक संस्थानों से संबंधित एक डाटाबेस का बृहत स्रोत केन्द्र स्थापित करे।

ii. विश्व हिंदी सचिवालय विश्व भर के हिंदी विद्वानों, लेखकों तथा हिंदी के प्रचार-प्रसार से संबद्ध लोगों का भी एक डाटाबेस तैयार करे।

iii. हिंदी भाषा की सूचना प्रौद्योगिकी के साथ अनुरूपता को देखते हुए सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों द्वारा हिंदी भाषा संबंधी उपकरण विकसित करने का महत्वपूर्ण कार्य जारी रखा जाए। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हर संभव सहायता प्रदान की जाए।

iv. विदेशों में हिंदी शिक्षण के लिए एक मानक पाठ्यक्रम तैयार किए जाने के लिए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा को अधिकृत किया जाता है।

v. अफ्रीका में हिंदी शिक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए और बदलते हुए वैश्विक परिवेश, युवा वर्ग की रुचि एवं आकांक्षाओं को देखते हुए उपयुक्त साहित्य एवं पुस्तकें तैयार की जाएं।

vi. सूचना प्रौद्योगिकी में देवनागरी लिपि के प्रयोग पर पर्याप्त सोफ्टवेयर तैयार किए जाएं ताकि इसका लाभ विश्व भर के हिंदी भाषियों और प्रेमियों को मिल सके।

vii. अनुवाद की महत्ता देखते हुए अनुवाद के विभिन्न आयामों के संदर्भ में अनुसंधान की आवश्यकता है, अतः इस दिशा में ठोस कार्रवाई की जाए।

viii. विश्व हिंदी सम्मेलनों के बीच अंतराल में विभिन्न देशों में विशिष्ट विषयों पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं। इनका उद्देश्य उनके अपने-अपने क्षेत्रों में हिंदी शिक्षण और हिंदी के प्रसार में आने वाली कठिनाइयों का समाधान खोजना है। सम्मेलन ने इसकी सराहना करते हुए इस बात पर बल दिया कि इस कार्य को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

ix. विश्व हिंदी सम्मेलनों में भारतीय और विदेशी विद्वानों को सम्मानित करने की परंपरा रही है इस विशिष्ट सम्मान के अनुरूप ही इन सम्मेलनों में विद्वानों को भेंट किए जाने वाले पुरस्कार अथवा सम्मान को गरिमापूर्ण नाम देते हुए इसे 'विश्व हिंदी सम्मान' कहा जाए।

x. विगत में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलनों में पारित प्रस्ताव को रेखांकित करते हुए हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ में आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता प्रदान किए जाने के लिए समय-बद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

xi. दो विश्व हिंदी सम्मेलनों के आयोजन के बीच यथासंभव अधिकतम तीन वर्ष का अंतराल रहे।

xii. 10वां विश्व हिंदी सम्मेलन भारत में आयोजित किया जाए।

नौवें विश्व हिंदी सम्मेलन में सम्मानित विद्वान

विदेशी विद्वान

क्र.सं. नाम
1. डॉ. पीटर गेरार्ड फ्रेडलांडर आस्ट्रेलिया
2. प्रो. सर्गेई सेरेब्रियानी रूस
3. डॉ. डगमार मारकोवा चेक
4. (श्री) मार्को जोली इटली
5. प्रो. लिऊ अन्वू चीन
6. डॉ. (श्रीमती) सरिता बूधू मॉरीशस
7. श्री बमरूंग खाम-एक थाईलैण्ड
8. प्रो. उपुल रंजीत हेवातानागामेज श्रीलंका
9. सुश्री वान्या जॉर्जिवा गनचेवा बुल्‍गारिया
10. श्री जबुल्लाह "फीकरी" अफगानिस्‍तान
11. श्री भोलानाथ नारायण सूरीनाम
12. सुश्री कैटरीना बालेरीवा दोवबन्या यूक्रेन
13. डॉ. कृष्ण कुमार यू के
14. प्रो. इंदु प्रकाश पाण्डेय जर्मनी
15. डॉ बारबरा लॉर्ट्ज जर्मनी
16. श्री सत्‍यदेव टेंगर मॉरीशस
17. प्रो. तिकेदी इशीदा जापान
18. श्री विजय राणा यू के
19. डॉ. बेदप्रकाश बटुक अमेरिका
20. डॉ. तोमाचो किकुचि जापान
सम्मानित भारतीय विद्वान
  • प्रो. एस. शेषारत्नम
  • श्री गोपाल दास नीरज
  • श्री बालकवि बैरागी
  • श्री मधुकर उपाध्याय
  • श्री हिमांशु जोशी
  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्रा
  • श्री कैलाश चंद्र पंत
  • श्री एम. पियोंग तेजमन 'जमीर'
  • प्रो. सी.ई. जीनी
  • डॉ. राम गोपाल शर्मा 'दिनेश'
  • प्रो. जाबिर हुसैन
  • प्रो. मधुसूदन त्रिपाठी
  • श्री ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी
  • प्रो. ललितांबा
  • सुश्री उषा गांगुली
  • डॉ. के. वनजा
  • डॉ. गिरजाशंकर त्रिवेदी
  • श्री जिया लाल आर्य
  • श्री हरिवंश
  • श्री वाय लक्ष्मी प्रसाद
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