सातवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन (सूरीनाम)

सातवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन
तिथि 5-9 जून, 2003
स्थान पारामारिबो, सूरीनाम
आयोजक सम्मेलन के संयोजक श्री जानकी प्रसाद सिंह थे।
विषय विश्व हिंदी – नई शताब्दी की चुनौतियाँ
प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता भारतीय प्रतिनिधिमंडल के नेता भारत के विदेश राज्य मंत्री श्री दिग्विजय सिंह थे।
उद्घाटन समारोह
सम्मेलन का उद्घाटन सम्मेलन का उद्घाटन सूरीनाम के राष्ट्रपति श्री रोनाल्डो रोनाल्ड वेनेत्शियान द्वारा किया गया।
अन्य वक्ता
  • श्री दिग्विजय सिंह, विदेश राज्य मंत्री, भारत सरकार
  • श्री मारिया क्रिस्तोफ ब्रिस्की, पोलैंड
  • श्री रामदीन सरजू, अध्यक्ष, सूरीनाम राष्ट्रीय सभा
  • श्री जानकी प्रसाद सिंह, सम्मेलन के संयोजक
  • राजदूत कृष्णदत्त नंदू
  • श्री ओमप्रकाश, सूरीनाम में भारत के राजदूत
समापन समारोह उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
  • श्री रतन कुमार अजोधिया, सूरीनाम के उपराष्ट्रपति
  • श्री दिग्विजय सिंह, विदेश राज्य मंत्री, भारत सरकार
शैक्षिक सत्र

विश्व हिंदी के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान
  • कैरिबियन देशों में हिंदी की स्थिति
  • एशियाई देशों में हिंदी की स्थिति
  • यूरोपीय देशों में हिंदी की स्थिति
  • अफ्रीकी देशों में हिंदी की स्थिति
  • अमरीकी देशों में हिंदी की स्थिति
  • दक्षिण प्रशांत में हिंदी की स्थिति
  • मध्य-पूर्व एशिया में हिंदी की स्थिति
  • संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी की स्थिति
हिंदी की बोलियों में नया सृजन
  • सरनामी का नया रचना संसार
  • मॉरीशस में हिंदी लेखन
  • फिजी बात में नया सृजन
  • नेपाली हिंदी की रचनाएं
  • नेताली हिंदी की रचनाएं
  • भारत में पूर्वी हिंदी में सृजन संसार
  • भारत में पश्चिमी हिंदी में सृजन संसार
विश्व हिंदी एवं सूचना प्रौ द्योगिकी की भूमिका
  • हिंदी और इंटरनेट
  • हिंदी में कम्प्यूटर प्रोद्योगिकी के बढ़ते परिदृश्य
  • देवनागरी लिपिः कम्प्यूटर के संदर्भ में
  • हिंदी के नये साफ्टवेयर
हिंदी और प्रसारण
  • हिंदी और रेडियो
  • हिंदी और टेलिविज़न
  • हिंदी और सिनेमा
  • हिंदी के सी.डी. एवं आडियो कैसेट्स
हिंदी और पत्रकारिता
  • हिंदी पत्रकारिता और अंतरराष्ट्रीय स्वरूप
  • हिंदी पत्रिकाएँ - विकास का एक दशक
  • हिंदी की पत्र-पत्रिकाएँ - भारतीय संदर्भ
  • हिंदी की पत्र-पत्रिकाएँ – वैश्विक संदर्भ
अर्थव्यवस्था में हिंदी की भूमिका
  • नई बाजार व्यवस्था और हिंदी
  • रोज़गार और हिंदी
  • विज्ञापन और हिंदी
  • हिंदी और पर्यटन उद्योग
हिंदी और शिक्षण व्यवस्था
  • भारतेतर देशों में सांस्कृतिक केन्द्रों में हिंदी शिक्षण
  • हिंदी शिक्षण का तकनीकी रूप
  • विश्व की अन्य भाषाएँ और हिंदी कोष
  • हिंदी की उच्च शिक्षा के अध्ययन में विभिन्न देशों का योगदान
  • मानक हिंदी पाठ्क्रम और पाठ्य पुस्तक निर्माण
भारतेतर देशों में हिंदी का समकालीन रचनात्मक परिदृश्य
  • समकालीन काव्य
  • समकालीन कथा साहित्य
  • समकालीन आलोचना साहित्य
  • समकालीन शोध एवं अनुसंधान
हिंदी में अनुवाद और संदर्भ साहित्य
  • हिंदी पुस्तकालय के विभिन्न पहलू
  • हिंदी अनुवाद की समस्याएँ
  • हिंदी भाषा – व्याकरण और मानकीकरण की समस्याएँ
  • हिंदी में बाल साहित्य और लोक कथाएँ
भविष्य की हिंदी और हिंदी का भविष्य – एक परिसंवाद
अन्य कार्यक्रम
प्रदर्शनी 'हिंदी हमारी धरोहर', राष्ट्रीय अभिलेखागार,
संस्कृति विभाग की प्रदर्शनी
  • पुस्तक प्रदर्शनी, नेशनल बुक ट्रस्ट
  • विदेश में हिंदी लेखन और रचनाकारों पर केंद्रित दो फिल्मों का प्रदर्शन किया गया।
  • सम्मेलन समाचार, दैनिक न्यूज बुलेटिन
सांस्कृतिक कार्यक्रम
  • श्री शेखर सेन द्वारा कबीर और तुलसी पर एकल नाट्य प्रस्तुतियां
  • प्रो. (श्रीमती) शारदा सिन्हा द्वारा पारंपरिक भोजपुरी गायन
  • श्री मनोज तिवारी द्वारा आधुनिक भोजपुरी गीत प्रस्तुति
  • श्रीमती सुमिता शर्मा द्वारा रामचरित मानस के प्रसंगों तथा श्रीमती महादेवी वर्मा के गीतों पर कथक प्रस्तुति
  • निजामी बंधुओं द्वारा कव्वाली
  • दिल्ली के ध्वनि ग्रुप के कलाकारों द्वारा कथक नृत्य प्रस्तुति
विदेशों से सहभागिता
  • भारत 200
  • सूरीनाम 100
  • गुयाना 17
  • त्रिनिडाड और टोबैगो 18
  • अन्य 12 से अधिक देशों की प्रतिभागिता

अन्य विशेषताएँ

विदेश राज्य मंत्री द्वारा बाबा-माई की प्रतिमा का माल्यार्पण और एक पथ हिंदी लॉन का उद्घाटन।

सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन में पारित मंतव्य

  • संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाया जाए।
  • विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी पीठों की स्थापना की जाए।
  • हिंदी भाषा और साहित्य का प्रचार-प्रसार, हिंदी शिक्षण संस्थाओं के बीच संबंध तथा भारतीय मूल के लोगों में हिंदी के प्रयोग के प्रचार के उपाय किए जाएं।
  • हिंदी के प्रचार हेतु वेबसाइट की स्थापना और सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग हो।
  • हिंदी विद्वानों की एक विश्व निर्देशिका का प्रकाशन किया जाए।
  • विश्व हिंदी दिवस का आयोजन हो।
  • कैरेबियाई हिंदी परिषद की स्थापना की जाए।
  • दक्षिण भारत के दस विश्वविद्यालयों में हिंदी विभाग की स्थापना की जाए।
  • भारत में एम. ए. हिंदी के पाठय़क्रम में विदेशों में रचित हिंदी लेखन को समुचित स्थान दिलाया जाए।
  • सूरीनाम में हिंदी शिक्षण का संवर्धन किया जाए।

सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन में सम्मानित विद्वान

विदेशी हिंदी विद्वान

क्र.सं. नाम

1.

श्री रामदेव धुरन्धर

मारीशस

2.

श्री सुबमणी

फिजी

3.

डॉ. रामदास चौधरी

यू.एस.ए.

4.

प्रो. आज़ाद समातोव

उज्बेकिस्तान

5.

प्रो. एनी मोंतो

फ्रांस

6.

डॉ. बी. रामबिलास

साउथ अफ्रीका

7.

प्रो. एच राजावोव

तजाकिस्तान

8.

डॉ. दानुता स्तासिक

पौलेंड

9.

श्रीमती अचला शर्मा

यू. के.

10.

प्रो. तोशियो तनाका

जापान

11.

डॉ. जीतनारायण

सूरीनाम

12.

डॉ. वरान्निकोव

रूस

13.

डॉ. लोथार लुत्से

जर्मनी

14.

डॉ. स्वेतिस्लाव कोस्तिक

चेक गणराज्य

15.

प्रो. येन हांग यून

चीन

16.

डॉ. ऊ पार्गो

म्यांमार

भारतीय हिंदी विद्वान

क्र.सं. नाम

1.

डॉ. एन बी राजगोपालन

2.

श्री बी. रामसंजीवैय्या

3.

प्रो. (श्रीमती) तंकामणि अम्मा

4.

डॉ. शंकर लाल पुरोहित

5.

डॉ. धर्मपाल मैनी

6.

श्री प्रभाष जोशी

7.

श्री कुंवर नारायण

8.

डॉ. दयाकृष्ण विजयवर्गीय

9.

श्रीमती मृदुला गर्ग

10.

श्री वेद प्रताप वैदिक

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