तृतीय विश्व हिंदी सम्मेलन (भारत)

तृतीय विश्व हिंदी सम्मेलन
तिथि दिनांक 28-30 अक्तूबर, 1983
स्थान दिल्ली, भारत
आयोजक राष्ट्रीय आयोजन समिति के अध्यक्ष, श्री बलराम जाखड़, अध्यक्ष, लोक सभा
बोधवाक्य 'वसुधैव कुटुंबकम्'
प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता मॉरीशस प्रतिनिधिमंडल के नेता श्री हरीश बुधू
उद्घाटन समारोह
सम्मेलन का उद्घाटन भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी द्वारा कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया
अध्यक्षता डॉ आर. एस. मैग्रेगर, प्राध्यापक, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
स्वागत भाषण श्री मधुकरराव चौधरी, कार्याध्यक्ष, राष्ट्रीय समिति
अन्य वक्ता
  • श्रीमती शीला कौल, शिक्षामंत्री, भारत सरकार
  • डॉ. बलराम जाखड़, अध्यक्ष लोक सभा एवं अध्यक्ष, राष्ट्रीय समिति
  • श्री श्रीकांत वर्मा, अध्यक्ष, प्रतिनिधि समिति
  • श्री हरीश बुधू, मारीशस प्रतिनिधिमंडल के नेता
  • श्री वियोगी हरि
आभार श्री शंकरराव लोंढे, महामंत्री (संगठन) राष्ट्रीय समिति
समापन समारोह
अध्यक्षता डॉ. बलराम जाखड़, अध्यक्ष लोक सभा एवं अध्यक्ष, राष्ट्रीय समिति
मुख्य वक्ता श्रीमती महादेवी वर्मा
स्वागत प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद
अन्य वक्ता
  • डॉ. चेलिशेव, रूस
  • श्री सोमदत्त बखौरी, मॉरीशस
  • श्री ल्यूको नान, चीन
  • श्री मधुकर राव चौधरी, अध्यक्ष, राष्ट्रीय समिति
धन्यवाद प्रो. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव, सचिव, संगठन समिति
शैक्षिक सत्र तीन पूर्ण सत्र हुए जिनके विषय थे
  • अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी प्रसार की संभावनाएँ और प्रयास
  • भारत के सांस्कृतिक संबंध और हिंदी
  • मानव मूल्यों की स्थापना और हिंदी की भूमिका
समानांतर सत्र
'आधुनिक भारत में हिंदी के बढ़ते चरण' विषय के अंतर्गत 28 अक्तूबर 1983 को छः समानांतर सत्र आयोजित किए गए
  • आधुनिक भारत में हिंदी साहित्य की विकास रेखाएं
  • आधुनिक भारत में हिंदी भाषा की प्रगति
  • आधुनिक भारत में हिंदी की वैज्ञानिक एवं तकनीकि प्रगति
  • देवनागरी लिपिः स्वरूप और संभावनाएँ
  • आधुनिक भारत में हिंदी पत्रकारिता की प्रगति
  • हिंदी के विकास में स्वैछिक संस्थाओं का योगदान
अंतरराष्ट्रीय संदर्भ और हिंदी विषय पर 29 अक्तूबर 1983 को तीन समानांतर सत्र आयोजित किए गए
  • भारतीय मूल के जन समुदाय में हिंदी का प्रसार, समस्याएँ और संभावनाएँ
  • विश्व के अन्य देशों में हिंदी का प्रचार-प्रसार, समस्याएँ और संभावनाएँ
  • संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में हिंदी का प्रयोग और संभावनाएं
'हिंदी का अंतर-भारतीय स्वरूप' विषय के अंतर्गत 30 अक्तूबर 1983 को छः समानांतर सत्र आयोजित किए गए
  • हिंदी और अन्य भाषाएँ: आदान-प्रदान (तमिल, तेलगु, मलयालम, कन्नड़)
  • हिंदी और अन्य भाषाएँ: आदान-प्रदान (मराठी, गुजराती और हिंदी की बोलियाँ)
  • हिंदी और अन्य भाषाएँ: आदान-प्रदान (बंगला, उड़िया, असमिया)
  • हिंदी और अन्य भाषाएँ: आदान-प्रदान (उर्दू, पंजाबी, कश्मीरी, सिंधी)
  • हिंदी और अन्य भाषाएँ: आदान-प्रदान (भोट, बर्मी और मुंडा परिवार)
  • हिंदी और प्राचीन भारतीय भाषाएँ: आदान-प्रदान (संस्कृत, पाली, अपभ्रंश)
अन्य कार्यक्रम
प्रदर्शनी
  • हिंदी के बढ़ते चरण (प्रौद्योगिकी खंड)
  • व्यवहार में हिंदी पर प्रदर्शनी
  • हिंदी तथा अंतरराष्ट्रीय भाषाओं की चित्रमय प्रदर्शनी
  • विदेशों में हिंदी पर प्रदर्शनी
  • संचार माध्यम और देवनागरी लिपि पर प्रदर्शनी
  • प्रकाशित पुस्तकों की प्रदर्शनी
  • 'रेल मंडल' प्रदर्शनी

सांस्कृतिक कार्यक्रम

  • भारतीय कला केंद्र की प्रस्तुति
  • मोहन राकेश द्वारा रचित नाटक 'आषाढ़ का एक दिन' की प्रस्तुति
  • कहानी कत्थक का संयोजन, पं. बिरजू महाराज
  • लोकनृत्य
  • रासलीला
  • कवि सम्मेलन
विदेशों से प्रतिभागिता 260 प्रतिनिधि
कुल प्रतिनिधि 6566
अन्य विशेषताएँ
  • दो स्मारिकाओं- ‘विश्व हिंदी’ और ‘विश्व के मानचित्र पर हिंदी’ का लोकार्पण
  • भाषा, गगनांचल, अक्षरा का लोकार्पण

तृतीय विश्व हिंदी सम्मेलन में पारित मंतव्य

  • सम्मेलन के लक्ष्यों और उद्देश्यों की पूर्ति के लिए निर्मित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्थायी समिति का गठन किया जाए।
  • सम्मेलन की संगठन समिति को इस कार्य के लिए अधिकार दिया जाए कि वह भारत के प्रधानमंत्री से परामर्श करके उनकी सहमति से स्थायी समिति का गठन करे।
  • इस समिति में देश-विदेश के 25 सदस्य हों।
  • इसके प्रारूप एवं संविधान, कार्य-विधि और सचिवालय की रूप रेखा निर्धारित करने के लिए यह समिति अपनी उप-समिति गठित करे जो तीन महीने के भीतर अपनी संस्तुति संगठन समिति को दे ओर उस पर कार्रवाई की जाए।

तृतीय विश्व हिंदी सम्मेलन में सम्मानित विद्वान

विदेशी विद्वान

क्र.सं. नाम
1. डा. विवेकानंद शर्मा फिजी
2. डा. दयानंद वसंतराय मारीशस
3. डा. इन्द्रा दस्सनायके श्रीलंका
4. श्री करुणा कुशलाक्षय थाईलैंड
5. श्री अहमद हमेरा पाकिस्तान
6. श्री ल्यू को नान चीन
7. श्रीमती अन्ना मारिया डी एंजालस इटली
8. श्री अल्कसेई बरखुरदारोव रूस

भारतीय विद्वान

अहिंदी भाषी भारतीय विद्वान

क्र.सं. नाम
1. श्री नवकांत बरुआ असमिया
2. श्री सीताकांत महापात्र उड़िया
3. श्री गुलाब रब्बानी तावा उर्दू
4. श्री गोपाल कृष्ण अडिग कन्नड़
5. डॉ. हरभजन सिंह पंजाबी
6. श्री विमल मित्र बंगला
7. श्री विजय तेंदुलकर मराठी
8. तकषि शिवशंकर पिल्ले मलयालम
9. श्री अखिलन तमिल
10. श्री राय प्रोलु सुब्बाराव तेलुगु
11. आचार्य श्री पट्टाभिराम शास्त्री संस्कृत

भारतीय हिंदी विद्वान

क्र.सं. नाम
1. प. नारायण चतुर्वेदी
2. श्री वियोगी हरि
3. श्री जैनेन्द्र कुमार
4. डा. हरिवंश राय बच्चन
5. डा. राम कुमार वर्मा
6. श्री गंगाशरण सिंह
7. श्री रामेश्वर दयाल दूबे
8. डा. बाबूराम सक्सेना
9. श्री उदय नारायण तिवारी
10. स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती (विज्ञान)
11. श्री फूलदेव सहाय वर्मा (विज्ञान)
12. श्री सुरेन्द्र शिवदास वारलिंगे (मनोविज्ञान)
13. श्री बनारसी दास चतुर्वेदी

हिंदी में साहित्य रचना करने वाले अहिंदी भाषी लेखक

क्र.सं. नाम
1. डा. एन.वी. कृष्णवारियर केरल
2. श्री वा. नागप्पा कर्नाट्क
3. श्री शंकर राव लोढे महाराष्ट्र
4. श्री बाल शौरी रेड्डी आंध्र प्रदेश
5. श्री जेठा लाल जोशी गुजरात
6. श्रीमती राजलक्ष्मी राघवन तमिल
7. डा. चन्द्र शेखर नायर केरल
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